Saturday, 20 October 2012

महाराजा अजमीढ़जी का इतिहास........!!


मैढ़ क्षत्रिय स्वर्णकार समाज श्री महाराजा अजमीढ़जी को अपना पितृ-पुरुष (आदि पुरुष) मानती है। ऐतिहासिक जानकारी जो विभिन्न रुपों में विभिन्न जगहों पर उपलब्ध हुई है उसके आधार पर हम मैढ़ क्षत्रिय अपनी वंशबेल को भगवान विष्णु से जुड़ा हुआ पाते हैं। कहा गया है कि भगवान विष्णु के नाभि-कमल से ब्रह्माजी की उत्पत्ति हुई। ब्रह्माजी से अत्री और अत्रीजी की शुभ दृष्टि से चंद्र-सोम हुए। चंद्रवंश की 28वीं पीढ़ी में अजमीढ़जी पैदा हुए। महाराजा अजमीढ़जी का जन्म त्रेतायुग के अन्त में हुआ था।
मर्यादा पुरुषोत्तम के समकालीन ही नहीं अपितु उनके परम मित्र भी थे। उनके दादा महाराजा श्रीहस्ति थे जिन्होंने प्रसिद्ध हस्तिनापुर बसाया था। महाराजा हस्ति के पुत्र विकुंठन एवं दशाह राजकुमारी महारानी सुदेवा के गर्भ से महाराजा अजमीढ़जी का जन्म हुआ। इनके अनेक भाईयों में से पुरुमीढ़ और द्विमीढ़ विशेष प्रसिद्ध हुए और दोनों पराक्रमी राजा थे। द्विमीढ़जी के वंश में मर्णान, कृतिमान, सत्य और धृति आदि प्रसिद्ध राजा हुए। पुरुमीढ़जी के कोई संतान नहीं हुई।
राज

ा हस्ती के येष्ठ पुत्र अजमीढ़ महान चक्रवर्ती राजा चन्द्रवंशी थे। महाराजा अजमीढ़ के दो रानियां सुयति व नलिनी थी। इनके गर्भ में बुध्ददिषु, ऋव, प्रियमेध व नील नामक पुत्र हुए। उनसे मैढ़ क्षत्रिय स्वर्णकार समाज का वंश आगे चला। अजमीढ़ ने अजमेर नगर बसाकर मेवाड़ की नींव डाली। महान क्षत्रिय राजा होने के कारण अजमीढ़ धर्म-कर्म में विश्वास रखते थे। वे सोने-चांदी के आभूषण, खिलौने व बर्तनों का निर्माण कर दान व उपहार स्वरुप सुपुत्रों को भेंट किया करते थे। वे उच्च कोटि के कलाकार थे। आभूषण बनाना उनका शौक था और यही शौक उनके बाद पीढ़ियों तक व्यवसाय के रुप में चलता आ रहा है।
समाज के सभी व्यक्ति इनको आदि पुरुष मानकर अश्विनी शुक्ल पूर्णिमा को अजमीढ़जी जयंती मनाते हैं।

|| जय अजमीढ़जी ||

Source:https://www.facebook.com/groups/nandkishor.mosun/

Saturday, 13 October 2012

मैढ़ क्षत्रिय स्वर्णकार समाज की बेटी डॉ. प्रियंका "IAS" अधिकारी बनी....!!


मैढ़ क्षत्रिय स्वर्णकार समाज की बेटी डॉ. प्रियंका "IAS" अधिकारी बनी....!!



मैढ़ क्षत्रिय स्वर्णकार समाज की बिटिया डॉ. प्रियंका ने साबित कर दिया की समाज की बेटिया किसी से पीछे नहीं है.
सूरतगढ़ के श्री बनवारीलालजी सोनी (सहदेव) की बड़ी बेटि प्रियंका ने करके IAS की परीक्षा में पुरे देश से ५२ वी रँक में आकार अपना और समाज का नाम स्वर्ण अक्षर से लिख दिया.
हमारे समाज के लिए ये बड़ी उपलब्धि और गर्व की बात है और प्रियंका ने बनकर पुरे स्वर्णकार समाज का नाम रोशन किया है और शायद प्रियंका हमारी समाज की पहली बेटिया है जिसने IAS की परीक्षा में पहले १०० में स्थान प्राप्त किया है.
पढ़ाई में हमेशा से अव्वल रहने वाली प्रियंका आरपीएमटी में भी टॉपर रह चुकी हैं। उसका सपना IAS बनने का था, जो आज पूरा हो गया।


डॉक्टर से प्रशासनिक अधिकारी बनी प्रियंका का कहना है की वह समाज हित के लिए कुछ खास करना चाहती थी और जिसके चलते ही उसने IAS बननेका सपना संजोया और दूसरी बार में ही कड़ी मेहनत और लगन से आल इंडिया में ५२ वी रँक प्राप्त करते हुए साबित कर दिया की अगर लगन हो तो देखे हुए सपने पुरे भी किये जा सकते है.
डॉ. प्रियंका स्वर्णकार समाज से चयनित पहली महिला IAS अधिकारी होगी.अजमीधजी ब्लॉग की और से डॉ. प्रियंका और श्री बनवारीलालजी सोनी (सहदेव) का हार्दिक हार्दिक अभिनन्दन.
डॉ प्रियंका ने भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी बन हमारे स्वर्णकार समाज की शान पुरे भारत में बढाई है और ऐसी बेटिया पर हमें नाज़ है.

"स्वर्णकार एकता जिंदाबाद"

Sunday, 26 August 2012

Blood Donation Camp.....!!

                 Blood Donation Camp.....in Kotdi Dham, Luharwas Dist.Sikar on 16-17 August 2012








Saturday, 30 June 2012

हमारा समाज.....!!



चन्द्रवंश में हस्ति नाम प्रतापी राजा की संतान विकुंठन के पुत्र महाराजा अजमीढ़ थे । उनकी माता का नाम रानी सुदेवा था। त्रेता युग में जब परशुराम्जी क्षत्रियों से कुपित होकर उनका संहार कर रहे थे ऐसे आपातकाल में वन स्थित ॠषि-मुनियों ने उन्हें शरण दी। तत्कालीन महाराज अजमीढ़जी क्षत्रियों की दयनीय दशा देखकर चिंतित रहने लगे। उन्हें स्वर्णकला का ज्ञान था, उन्होंने राज्य का कार्यभार युवराज संवरण को सौंपा व वानप्रस्थ आश्रम पहुंच आश्रम स्थापित किया व भयातुर क्षत्रियों को संरक्षण दिया। स्वर्णकारी की शिक्षा देकर सम्मान प्रदान किया। जनकपुरी में शिवधनुष भंग होने के अवसर पर रामजी से परशुरामजी का वार्तालाप होने पर क्षत्रियों के प्रति क्रोध शांत हुआ। जो क्षत्रिय स्वर्णकला में पारंगत हो चुके थे, उन्होंने इस स्वर्णकला को अपनाए रखा व पीढ़ी दर पीढ़ी उन्नत करते हुए सर्वोच्च शिखर पर पहुँचाया।
"श्री अजमीढ़ जी महाराज की जय"

Wednesday, 16 May 2012

मैं स्वर्णकार हूँ......!!

मैं स्वर्णकार हूँ ,स्वर्णकार होने का मुझको स्वाभिमान ।
मेरी नस-नस में क्षत्रिय रक्तम मैं अजमीढ़ का वंशज हूँ,
मैं मानवता का दिव्य तेज, मैं क्षत्रिय वर्ग का सूरज हूँ ,
मैं हूँ भारत की शान मैं स्वर्णकार हूँ ।।
मैं स्वर्णकार हूँ,स्वर्णकार होन
े का मुझको स्वाभिमान ।
मैं भारत माँ का पुत्र, मम हाथों में स्वर्ण व्यापर तन्त्र,
मैं स्वदेश की अर्थ रीड, मैं भारत का समृद्ध मन्त्र ,
मैं हूँ समाज का कीर्तिमान,मैं स्वर्णकार हूँ ।।
मैं स्वर्णकार हूँ, स्वर्णकार होने का मुझको स्वाभिमान

| जय महाराजा श्री अजमीढ़ जी |

Monday, 23 April 2012

अक्षय तृतीया की अक्षय शुभकामनाये...!!





आप सभी स्वर्णकार भाइयो और परिवार को अक्षय तृतीया की पुन्य वेला पर अक्षय शुभकामनाये.
अक्षय तृतीया का दिन एक पवित्र दिन है और इस पुरे के पुरे दिन को ही शुभ दिन माना जाता है . 
अक्षय का अर्थ है जो कभी नष्ट नहीं होता है .इसलिए आज के दिन किये गए दान पुण्य का अवश्य फल प्राप्त होता है एवं कोई भी नया कार्य जो आज प्रारंभ किया गया हो उसमे सफलता और उन्नति का होना अनिवार्य है .
आज के दिन प्रारंभ किये गए कार्य सौभाग्यशाली और सफल होते है .इसलिए आज बहुत से लोग सोने के गहने-जवाहरात भी खरीदते है.
मिल जाता है अतुल्य वैभव निश्चय ही निश्छल भाव ही होता है अक्षय और स्वीकृत उन चरणों को जिन्हें मां लक्ष्मी सराहती है.

| ॐ श्री लक्ष्मी नारायणाय नम: |


| जय अजमीढ़ जी महाराज |

Tuesday, 3 April 2012

श्री मैढ़ क्षत्रिय स्वर्णकार युवक मंडल का अनमोल छायाचित्र



सन १९५२ में अखिल भारतीय मैढ़ क्षत्रिय समाज के अधिवेशन के अवसर पर श्री मैढ़ क्षत्रिय स्वर्णकार युवक मंडल के तत्कालीन गणमान्य कर्मठ समाजबंधू  एव पदाधिकारीयो का अनमोल छायाचित्र




छायाचित्र का विवरण :

१ ली लाइन - मगराजजी लावट,रामरतनजी कडेल,किसनलालजी सिणगत,दगड़ूलालजी मोसुन,रतनलालजी कडेल,सुवालालजी सहदेव,लखमीचन्द्रजी सहदेव 
२ री लाइन - मदनजी महाराज,हरिरामजी अग्रोया,दानमलजी सहदेव,जयनारायनजी कडेल,बन्सिलालजी कडेल,बस्तीरामजी मिरंडिया,देविलालजी सहदेव
२ री लाइन - नंद्लालजी सिणगत,शिवनारायणजी अग्रोया,जीतमलजी अग्रोया,सुखदेवजी कडेल,किसनलालजी कडेल,रामचंद्रजी जडिया (कुकरा),बालमुकुंदजी जडिया (कुकरा)
निचे बैठे हुए - रामगोपालजी कडेल,गुलाबचन्द्रजी सहदेव,राधेश्यामजी माय


Proud To Be SWARNKAR.....!!

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